१.जेसा कि पिछलि बार हुआ इस बार भी कांग्रेसी नेताओ पर इस पार्टी ने जमकर कीचड उछाला . पिछलि बार सोनिया गांधी पर तो इस बार मनमोहन सींह पर . वह भी छिछोरे लेवेल पर.
भारत का आम मतदाता कभी भी किसी पर चारित्रीक हमला बर्दास्त नहि करता . और भाजपा यह गलती लगातार दोहरा रही हे. और मतदताओ के हाथो मुह कि खा रही हे
२.पार्टि के सांसद जनता से पूरे पांच साल कटे रहे और चुनाव आते ही वोट मान्गने आ पहुंचे . एसे केसे वापस चुने जाते . केवल हिन्दुत्व जीत का मूलमंत्र नही हे. जीत के तीन एक दुसरे के पूरक मंत्र हे
अ. जनसंपर्क (नेता को जनता से जुडा होना चाहिये . जनता नेता से अपनापन मह्सूस करे ना कि केवल वोट के समय आने वाला व्यक्ति समझे .)
ब. विकास ( केवल जन्संपर्क नही जितायेगा साथ मे विकास कि नदि भी आपके यहा आनि चाहिये जब जनता वापस उसी व्यक्ती कोप चुनेगि.)
स. जातिगत गणीत इन उपरि दोनो चीजो के साथ जातिगत गणीत का भी साथ होना चाहिये . यह आज की हकीकत हे पार्टी जितना जल्दी समझ जाये उतना इसके लिये बेहतर होगा.
भाजपा का हिन्दुत्व महात्मा गांधी के हिन्दुत्व से अलग नही हे . जब तक ये बात पार्टी जनता क्पो समझा नहि सकेगी तब तक पार्टी अपना मत प्रतीशत नही बढा सकेगी .
गांधिजी भारत के इसाईकरण के खीलाफ़ थे . यह साबीत करना आसान सा काम हे .यह काम न कर के बेमतलब के चिल्लाने से क्या लाभ हो सकता हे मुझे तो समझ मे नही आता .
हिन्दुत्व साध्य हे साधन नहि . भाजपा साध्य को साधन बनाने कि भूल कर रही हे . और लगातार हार रही हे. और तब तक हारती रहेगी जब तक उपरि चीजो पर गौर कर के सुधरति नहि.
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